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जायद मूंग (Mung Bean) की प्रमुख किस्में.


जायद मूंग (Mung Bean) की प्रमुख किस्में:

  1. PDM-139

    • यह किस्म उच्च उत्पादन देने वाली है और मुख्य रूप से गर्म जलवायु में उगाई जाती है।
  2. SML-668

    • यह किस्म रोग प्रतिरोधी है और उच्च गुणवत्ता वाले बीज देती है।
  3. T-44

    • यह किस्म जल्दी पकने वाली होती है और सूखा सहनशील है।
  4. Sujata

    • यह किस्म मध्यम अवधि वाली है और अच्छी पैदावार देती है।
  5. RMG-62

    • यह किस्म मुख्य रूप से उच्च उपज के लिए जानी जाती है और विभिन्न जलवायु परिस्थितियों में उपयुक्त है।
  6. Urd-4

    • यह किस्म बड़े दाने और उच्च गुणवत्ता वाली होती है।

जायद मूंग के प्रमुख रोग:

  1. पाउडरी मिल्ड्यू (Powdery Mildew)

    • यह रोग पत्तियों पर सफेद पाउडर जैसा पदार्थ बनाता है, जिससे पौधा कमजोर हो जाता है।
  2. एन्थ्रेक्नोज (Anthracnose)

    • यह रोग पत्तियों और तनों पर काले धब्बे बनाता है और पौधे की वृद्धि रुक जाती है।
  3. विल्ट (Wilt)

    • इस रोग में पौधा मुरझाकर सूख जाता है और उसकी जड़ें कमजोर हो जाती हैं।
  4. रेड रॉट (Red Rot)

    • यह रोग मूंग की जड़ों को प्रभावित करता है और जड़ों की सड़न का कारण बनता है।
  5. बैक्टीरियल ब्लाइट (Bacterial Blight)

    • यह रोग पत्तियों को पीला और मुरझा देता है, जिससे पौधा कमजोर हो जाता है।
  6. लेफ्ट रॉट (Leaf Rot)

    • यह रोग पत्तियों और तनों पर धब्बे बना देता है, जिससे पौधे की स्वास्थ्य पर असर पड़ता है।

जायद मूंग के प्रमुख कीट:

  1. अफीदा (Aphids)

    • यह कीट पत्तियों और तनों का रस चूसते हैं, जिससे पौधा कमजोर हो जाता है और उसकी वृद्धि धीमी हो जाती है।
  2. हॉपर्स (Hoppers)

    • ये कीट पत्तियों को नुकसान पहुंचाते हैं और फसल के रस को चूसते हैं, जिससे उपज में कमी आती है।
  3. कटवर्म (Cutworm)

    • यह कीट तनों को काटकर पौधों को गिरा देता है, जिससे फसल को भारी नुकसान हो सकता है।
  4. लेफ्ट माइनर (Leaf Miner)

    • यह कीट पत्तियों में सुरंग बनाकर उन्हें नुकसान पहुंचाता है।
  5. माइट्स (Mites)

    • ये छोटे कीट पत्तियों का रस चूसते हैं, जिससे पत्तियां सिकुड़ जाती हैं और फसल कमजोर हो जाती है।
  6. थ्रिप्स (Thrips)

    • ये कीट पत्तियों का रस चूसते हैं और पत्तियों को सिकुड़ने और झुलसने का कारण बनते हैं।

इन रोगों और कीटों की रोकथाम के लिए उचित कीटनाशकों का उपयोग, फसल चक्र और जैविक नियंत्रण की विधियों का पालन करना आवश्यक है।

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