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Insect Pest Management में फेरोमोन ट्रैप और स्टिकी ट्रैप.(Pheromone Trap + Sticky Trap in Hindi)

🐛 Insect Pest Management में फेरोमोन ट्रैप और स्टिकी ट्रैप (Pheromone Trap + Sticky Trap in Hindi) आज के आधुनिक कृषि दौर में कीट नियंत्रण एक बड़ी चुनौती बन चुका है। अधिक रासायनिक कीटनाशकों के उपयोग से न केवल लागत बढ़ती है, बल्कि मिट्टी, पानी और मानव स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ऐसे में फेरोमोन ट्रैप और स्टिकी ट्रैप जैसे जैविक और सुरक्षित उपाय Insect Pest Management (IPM) का अहम हिस्सा बन गए हैं। 🌿 फेरोमोन ट्रैप क्या है? फेरोमोन ट्रैप एक विशेष प्रकार का कीट नियंत्रण उपकरण है, जिसमें कीटों की प्राकृतिक आकर्षक गंध (Pheromone) का उपयोग किया जाता है। यह गंध मुख्य रूप से नर कीटों को आकर्षित करती है, जिससे वे ट्रैप में फँस जाते हैं और प्रजनन प्रक्रिया रुक जाती है। 🧪 फेरोमोन ट्रैप कैसे काम करता है? मादा कीट द्वारा छोड़ी जाने वाली गंध की नकल वही गंध ल्यूअर के रूप में ट्रैप में लगाई जाती है नर कीट आकर्षित होकर ट्रैप में फँस जाता है कीटों की संख्या धीरे-धीरे कम होती है 🌾 फेरोमोन ट्रैप से नियंत्रित होने वाले प्रमुख कीट फल छेदक कीट (Fruit Borer) तना छेदक (Stem Borer) अमेरिक...

Insect Pest Management में फेरोमोन ट्रैप और स्टिकी ट्रैप

Insect Pest Management में फेरोमोन ट्रैप और स्टिकी ट्रैप (Pheromone Trap + Sticky Trap in Hindi) आज के आधुनिक कृषि दौर में कीट नियंत्रण एक बड़ी चुनौती बन चुका है। अधिक रासायनिक कीटनाशकों के उपयोग से न केवल लागत बढ़ती है, बल्कि मिट्टी, पानी और मानव स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ऐसे में फेरोमोन ट्रैप और स्टिकी ट्रैप जैसे जैविक और सुरक्षित उपाय Insect Pest Management (IPM) का अहम हिस्सा बन गए हैं। फेरोमोन ट्रैप क्या है? फेरोमोन ट्रैप एक विशेष प्रकार का कीट नियंत्रण उपकरण है, जिसमें कीटों की प्राकृतिक आकर्षक गंध ( Pheromone ) का उपयोग किया जाता है। यह गंध मुख्य रूप से नर कीटों को आकर्षित करती है, जिससे वे ट्रैप में फँस जाते हैं और प्रजनन प्रक्रिया रुक जाती है। फेरोमोन ट्रैप कैसे काम करता है? मादा कीट द्वारा छोड़ी जाने वाली गंध की नकल वही गंध ल्यूअर के रूप में ट्रैप में लगाई जाती है नर कीट आकर्षित होकर ट्रैप में फँस जाता है कीटों की संख्या धीरे-धीरे कम होती है फेरोमोन ट्रैप से नियंत्रित होने वाले प्रमुख कीट फल छेदक कीट (Fruit Borer) तन...

सोयाबीन की फसल में खरपतवार: नाम, नुकसान और नियंत्रण उपाय.

सोयाबीन की फसल में खरपतवार सोयाबीन की फसल में प्रमुख खरपतवार सोयाबीन की फसल में खरपतवार उपज को 30–70% तक कम कर सकते हैं। सही पहचान और नियंत्रण बेहद ज़रूरी है। सोयाबीन की फसल में प्रमुख खरपतवार सोयाबीन की फसल में खरपतवार उपज को 30–70% तक कम कर सकते हैं। सही पहचान और नियंत्रण बेहद ज़रूरी है। 1. घास वर्ग के खरपतवार सांवां (Echinochloa colona / Echinochloa crusgalli) कोदों (Eleusine indica) मकड़ा (Dactyloctenium aegyptium) दूब (Cynodon dactylon) वनचरी (Sorghum halepense) गिनिया घास (Panicum dichotomiflorum) 2. चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार साठी (Trianthema portulacastrum) कनकवा (Commelina benghalensis) कोन्दरा (Digera arvensis) कंटीली चौलाई (Amaranthus spinosus) मकोय (Solanum nigrum) बड़ी दूधी (Euphorbia hirta) हजार दाना (Phyllanthus niruri) जल भंगरा (Eclipta alba) पुनर्नवा (Boerhavia diffusa) गाजर...

गेहूं की फसल में कीटनाशक डालने का सही तरीका | 2026 पूरी जानकारी

गेहूं की फसल में कीटनाशक डालने का सही तरीका | 2026 पूरी जानकारी गेहूं भारत की प्रमुख फसल है, लेकिन कीट और रोग इसके उत्पादन को काफी नुकसान पहुंचाते हैं। इस लेख में हम जानेंगे गेहूं की फसल में कीटनाशक डालने का सही तरीका , सही समय, मात्रा और सावधानियां, जिससे किसान भाई अधिक पैदावार पा सकें। गेहूं की फसल में लगने वाले प्रमुख कीट गेहूं की फसल में तना छेदक, माहू (एफिड), दीमक जैसे कीट अधिक नुकसान पहुंचाते हैं। समय पर नियंत्रण न किया जाए तो पैदावार 30–40% तक कम हो सकती है। कीटनाशक का सही चयन कैसे करें कीटनाशक का चयन करते समय कीट की पहचान करना जरूरी है। हमेशा कृषि विशेषज्ञ की सलाह से ही दवा का चुनाव करें। फसल की अवस्था के अनुसार दवा चुनें सरकारी अनुशंसित कीटनाशक का उपयोग करें एक ही दवा बार-बार न डालें कीटनाशक डालने का सही समय और मात्रा कीटनाशक सुबह या शाम के समय छिड़काव करना सबसे अच्छा माना जाता है। दवा की मात्रा लेबल पर लिखी मात्रा के अनुसार ही प्रयोग करें। कीटनाशक छिड़काव करते समय सावधानियां छिड़काव करते समय दस्ताने, मास्क और पूरे कपड़े पहनें...

N + K + Cu + S (100% जल में घुलनशील मिश्रित उर्वरक) ब्लू श्योर में प्रमुख पोषक तत्व (पोटेशियम, नाइट्रोजन, कॉपर, सल्फर) अवशोषक रूप में मौजूद होते हैं

Blogger Post N + K + Cu + S (100% जल में घुलनशील मिश्रित उर्वरक) ब्लू श्योर पोटेशियम, नाइट्रोजन, सल्फर और कॉपर से भरपूर है ब्लू श्योर एक विशेष रूप से निर्मित 100% जल में घुलनशील पोषक तत्वों का मिश्रण उर्वरक है, जो इसे सभी फसलों के लिए एक प्रभावी समाधान बनाता है। ब्लू श्योर पोटेशियम, नाइट्रोजन, सल्फर और कॉपर से भरपूर है और इसका उपयोग सभी कृषि फसलों, सब्जियों, लताओं और फलों के वृक्षों के उर्वरक के लिए किया जाता है। ब्लूश्योर को जड़ क्षेत्र में डालने पर यह घुलने की प्रक्रिया से गुजरता है, जिससे पोटेशियम, नाइट्रोजन, कॉपर और सल्फर जैसे आवश्यक पोषक तत्व मिट्टी में मुक्त हो जाते हैं। ये पोषक तत्व पौधों की जड़ों द्वारा आसानी से अवशोषित हो जाते हैं। इसके अलावा, ब्लूश्योर में मौजूद खनिज अंतर-संवर्धन प्रक्रियाओं या रोगजनकों के हमले से क्षतिग्रस्त कोशिका भित्ति को सिकोड़ते हैं और एंटीऑक्सीडेंट मुक्त करते हैं। यह दोहरी क्रिया न केवल पौधों के स्वास्थ्य को बढ़ाती है बल्कि उन्हें विभिन्न रोगजनकों ...

वर्मी कम्पोस्ट (Vermibed) यूनिट | जैविक खेती

राजस्थान सरकार द्वारा चलाई जा रही गोवर्धन जैविक उर्वरक योजना का उद्देश्य किसानों को जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित करना है। इस योजना के अंतर्गत वर्मी कम्पोस्ट (Vermibed) यूनिट स्थापित करने पर किसानों को अनुदान प्रदान किया जाता है। 🧑‍🌾 *योजना की मुख्य विशेषताएं:* अनुदान राशि: वर्मी कम्पोस्ट यूनिट की स्थापना पर कुल लागत का 50% या अधिकतम ₹10,000 तक का अनुदान दिया जाता है।   *यूनिट का आकार:*  अनुशंसित आकार लगभग 20 फीट लंबा, 3 फीट चौड़ा और 2.5 फीट गहरा होता है।   *लाभार्थी पात्रता:*  राजस्थान के मूल निवासी किसान, जिनके 3 गोवंश पशु हैं, इस योजना के लिए पात्र हैं।   खेती लायक जमीन 📝 *आवेदन प्रक्रिया:* 1. ऑनलाइन आवेदन: किसान राज किसान साथी पोर्टल या ई-मित्र पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।  2. *आवश्यक दस्तावेज़:* जन आधार नंबर  पशुओं की जानकारी भूमि संबंधी दस्तावेज़  3. आवेदन की स्थिति: आवेदन की स्थिति की जानकारी SMS के माध्यम से प्रदान की जाएगी।  

जिप्सम: क्षारीय भूमि सुधार के लिए एक प्राकृतिक समाधान.

🌾 जिप्सम: क्षारीय भूमि सुधार के लिए एक प्राकृतिक समाधान किसान भाइयों, क्या आप अपनी क्षारीय भूमि को सुधारना चाहते हैं और अपनी फसलों की उत्पादकता बढ़ाना चाहते हैं जिप्सम एक प्राकृतिक द्वितीयक खनिज है जिसमें 16-19% कैल्सियम और 13-16% सल्फर पाया जाता है। यह क्षारीय भूमि में सुधार और मृदा में द्वितीयक पोषक तत्वों की पूर्ति करने में मदद करता है। *🌾 सरकारी योजना* राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए एक योजना शुरू की है, जिसके तहत कृषकों को क्षारीय भूमि सुधार कार्यक्रम के अन्तर्गत 50% अनुदान पर जिप्सम उपलब्ध करवाई जाएगी। इस योजना के तहत: *🌾 अधिकतम 2 हैक्टेयर जमीन के लिए 50% अनुदान*: एक कृषक को अधिकतम 2 हैक्टेयर जमीन के लिए 50% अनुदान पर जिप्सम उपलब्ध करवाई जाएगी। - *🌾 5 मैट्रिक टन जिप्सम प्रति हैक्टेयर*: भूमि सुधार के लिए एवं जिप्सम मांग रिपोर्ट के अनुसार 1 हैक्टेयर के लिए अधिकतम 5 मैट्रिक टन जिप्सम किसान को उपलब्ध करवाई जाएगी। - *🌾खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत अनुदान*: किसान को पोषक तत्व के रूप में खाद्य सुरक्षा मिशन - दलहन एवं गेहूं के तहत 250 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर के ह...

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