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गेहूं की फसल में कीटनाशक डालने का सही तरीका | 2026 पूरी जानकारी

गेहूं की फसल में कीटनाशक डालने का सही तरीका | 2026 पूरी जानकारी गेहूं भारत की प्रमुख फसल है, लेकिन कीट और रोग इसके उत्पादन को काफी नुकसान पहुंचाते हैं। इस लेख में हम जानेंगे गेहूं की फसल में कीटनाशक डालने का सही तरीका , सही समय, मात्रा और सावधानियां, जिससे किसान भाई अधिक पैदावार पा सकें। गेहूं की फसल में लगने वाले प्रमुख कीट गेहूं की फसल में तना छेदक, माहू (एफिड), दीमक जैसे कीट अधिक नुकसान पहुंचाते हैं। समय पर नियंत्रण न किया जाए तो पैदावार 30–40% तक कम हो सकती है। कीटनाशक का सही चयन कैसे करें कीटनाशक का चयन करते समय कीट की पहचान करना जरूरी है। हमेशा कृषि विशेषज्ञ की सलाह से ही दवा का चुनाव करें। फसल की अवस्था के अनुसार दवा चुनें सरकारी अनुशंसित कीटनाशक का उपयोग करें एक ही दवा बार-बार न डालें कीटनाशक डालने का सही समय और मात्रा कीटनाशक सुबह या शाम के समय छिड़काव करना सबसे अच्छा माना जाता है। दवा की मात्रा लेबल पर लिखी मात्रा के अनुसार ही प्रयोग करें। कीटनाशक छिड़काव करते समय सावधानियां छिड़काव करते समय दस्ताने, मास्क और पूरे कपड़े पहनें...

N + K + Cu + S (100% जल में घुलनशील मिश्रित उर्वरक) ब्लू श्योर में प्रमुख पोषक तत्व (पोटेशियम, नाइट्रोजन, कॉपर, सल्फर) अवशोषक रूप में मौजूद होते हैं

Blogger Post N + K + Cu + S (100% जल में घुलनशील मिश्रित उर्वरक) ब्लू श्योर पोटेशियम, नाइट्रोजन, सल्फर और कॉपर से भरपूर है ब्लू श्योर एक विशेष रूप से निर्मित 100% जल में घुलनशील पोषक तत्वों का मिश्रण उर्वरक है, जो इसे सभी फसलों के लिए एक प्रभावी समाधान बनाता है। ब्लू श्योर पोटेशियम, नाइट्रोजन, सल्फर और कॉपर से भरपूर है और इसका उपयोग सभी कृषि फसलों, सब्जियों, लताओं और फलों के वृक्षों के उर्वरक के लिए किया जाता है। ब्लूश्योर को जड़ क्षेत्र में डालने पर यह घुलने की प्रक्रिया से गुजरता है, जिससे पोटेशियम, नाइट्रोजन, कॉपर और सल्फर जैसे आवश्यक पोषक तत्व मिट्टी में मुक्त हो जाते हैं। ये पोषक तत्व पौधों की जड़ों द्वारा आसानी से अवशोषित हो जाते हैं। इसके अलावा, ब्लूश्योर में मौजूद खनिज अंतर-संवर्धन प्रक्रियाओं या रोगजनकों के हमले से क्षतिग्रस्त कोशिका भित्ति को सिकोड़ते हैं और एंटीऑक्सीडेंट मुक्त करते हैं। यह दोहरी क्रिया न केवल पौधों के स्वास्थ्य को बढ़ाती है बल्कि उन्हें विभिन्न रोगजनकों ...

वर्मी कम्पोस्ट (Vermibed) यूनिट | जैविक खेती

राजस्थान सरकार द्वारा चलाई जा रही गोवर्धन जैविक उर्वरक योजना का उद्देश्य किसानों को जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित करना है। इस योजना के अंतर्गत वर्मी कम्पोस्ट (Vermibed) यूनिट स्थापित करने पर किसानों को अनुदान प्रदान किया जाता है। 🧑‍🌾 *योजना की मुख्य विशेषताएं:* अनुदान राशि: वर्मी कम्पोस्ट यूनिट की स्थापना पर कुल लागत का 50% या अधिकतम ₹10,000 तक का अनुदान दिया जाता है।   *यूनिट का आकार:*  अनुशंसित आकार लगभग 20 फीट लंबा, 3 फीट चौड़ा और 2.5 फीट गहरा होता है।   *लाभार्थी पात्रता:*  राजस्थान के मूल निवासी किसान, जिनके 3 गोवंश पशु हैं, इस योजना के लिए पात्र हैं।   खेती लायक जमीन 📝 *आवेदन प्रक्रिया:* 1. ऑनलाइन आवेदन: किसान राज किसान साथी पोर्टल या ई-मित्र पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।  2. *आवश्यक दस्तावेज़:* जन आधार नंबर  पशुओं की जानकारी भूमि संबंधी दस्तावेज़  3. आवेदन की स्थिति: आवेदन की स्थिति की जानकारी SMS के माध्यम से प्रदान की जाएगी।  

जिप्सम: क्षारीय भूमि सुधार के लिए एक प्राकृतिक समाधान.

🌾 जिप्सम: क्षारीय भूमि सुधार के लिए एक प्राकृतिक समाधान किसान भाइयों, क्या आप अपनी क्षारीय भूमि को सुधारना चाहते हैं और अपनी फसलों की उत्पादकता बढ़ाना चाहते हैं जिप्सम एक प्राकृतिक द्वितीयक खनिज है जिसमें 16-19% कैल्सियम और 13-16% सल्फर पाया जाता है। यह क्षारीय भूमि में सुधार और मृदा में द्वितीयक पोषक तत्वों की पूर्ति करने में मदद करता है। *🌾 सरकारी योजना* राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए एक योजना शुरू की है, जिसके तहत कृषकों को क्षारीय भूमि सुधार कार्यक्रम के अन्तर्गत 50% अनुदान पर जिप्सम उपलब्ध करवाई जाएगी। इस योजना के तहत: *🌾 अधिकतम 2 हैक्टेयर जमीन के लिए 50% अनुदान*: एक कृषक को अधिकतम 2 हैक्टेयर जमीन के लिए 50% अनुदान पर जिप्सम उपलब्ध करवाई जाएगी। - *🌾 5 मैट्रिक टन जिप्सम प्रति हैक्टेयर*: भूमि सुधार के लिए एवं जिप्सम मांग रिपोर्ट के अनुसार 1 हैक्टेयर के लिए अधिकतम 5 मैट्रिक टन जिप्सम किसान को उपलब्ध करवाई जाएगी। - *🌾खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत अनुदान*: किसान को पोषक तत्व के रूप में खाद्य सुरक्षा मिशन - दलहन एवं गेहूं के तहत 250 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर के ह...

बिना ज़हर के कीट नियंत्रण – Spinosad का चमत्कारी असर, Spinosad Spray Guide: सुरक्षित, असरदार और जैविक कीट प्रबंधन का तरीका

Spinosad (स्पाइनोसैड) की पूरी जानकारी दी गई है — उपयोग , प्रयोग विधि , और एक आकर्षक ब्लॉग टाइटल के साथ: 🧪 Spinosad का उपयोग : Spinosad एक जैविक स्रोत से बना कीटनाशक है, जो Saccharopolyspora spinosa नामक बैक्टीरिया से तैयार किया जाता है। यह कीटों की तंत्रिका प्रणाली पर असर डालकर उन्हें जल्दी मारता है। मुख्य रूप से यह छेदक और चूसक कीटों जैसे: फल छेदक (Fruit borer) हीरा कीट (Diamondback moth) थ्रिप्स पत्ती खाने वाले कीट कैटरपिलर (Lepidopteran larvae) पर असरकारी होता है। फसलें: सब्जियाँ (टमाटर, मिर्च, गोभी), फल, कपास, मक्का, और बागवानी फसलें ⚗️ Spinosad की प्रयोग विधि : फसल लक्षित कीट मात्रा (ml प्रति लीटर पानी) प्रयोग विधि टमाटर/मिर्च फल छेदक, थ्रिप्स 0.3 – 0.5 ml फूल आने या फल बनने के समय छिड़काव गोभी हीरा कीट, कैटरपिलर 0.5 ml कीट दिखने पर या 10 दिन के अंतराल में कपास पत्ती खाने वाले कीट 0.5 ml सुबह या शाम के समय स्प्रे करें फलदार पौधे थ्रिप्स, फल मक्खी 0.4 – 0.6 ml ज़रूरत अनुसार 2–3 बार छिड़काव करें ✅ खास बात: Spin...

Lambda-cyhalothrin: फसल सुरक्षा का आधुनिक हथियार – जानिए उपयोग और फायदे, Lambda-cyhalothrin Spray Guide: असरदार कीट नियंत्रण का स्मार्ट तरीका

Lambda-cyhalothrin (लैम्ब्डा-साइहैलोथ्रिन) की पूरी जानकारी दी गई है — उपयोग , प्रयोग विधि , और एक बढ़िया ब्लॉग टाइटल के साथ: 🧪 Lambda-cyhalothrin का उपयोग : Lambda-cyhalothrin एक संपर्क और पेट क्रिया वाला पायरेथ्रॉइड कीटनाशक है, जो कीटों की तंत्रिका प्रणाली को प्रभावित करता है और उन्हें जल्दी मारता है। यह मुख्यतः छेदक और चबाने वाले कीटों जैसे तना छेदक, फल छेदक, पत्ती लपेटक, थ्रिप्स, और एफिड्स के नियंत्रण में उपयोग होता है। फसलें: धान, कपास, मक्का, गेहूं, सब्जियाँ, और फलदार वृक्ष ⚗️ प्रयोग विधि : फसल लक्षित कीट मात्रा (ml प्रति लीटर पानी) प्रयोग विधि धान तना छेदक, पत्ती लपेटक 0.5 – 1.0 ml फूल आने से पहले स्प्रे करें कपास थ्रिप्स, सफेद मक्खी 0.6 – 0.8 ml सुबह या शाम को पत्तियों पर छिड़काव सब्जियाँ फल छेदक, हीरा कीट 0.5 – 0.75 ml 7–10 दिन के अंतराल पर स्प्रे मक्का तना छेदक 0.75 – 1.0 ml कीट दिखते ही स्प्रे करें 🧴 ध्यान दें : स्प्रे हमेशा साफ पानी से करें। पूरे पौधे को अच्छी तरह भिगोएँ, ताकि कीटनाशक की पहुँच सभी हिस्सों तक हो। ...

गुलाब की फसल में लगने वाले प्रमुख रोग और उनका नियंत्रण | Rose Diseases in Hindi

गुलाब की फसल में लगने वाले प्रमुख रोग और उनका नियंत्रण | Rose Diseases in Hindi गुलाब की फसल में रोग गुलाब की फसल में लगने वाले प्रमुख रोग 1. झुलसा रोग (Black Spot) लक्षण: पत्तियों पर काले गोल धब्बे, पत्तियाँ पीली होकर झड़ने लगती हैं। नियंत्रण: रोगग्रस्त पत्तियाँ हटाएँ, मैनकोजेब 0.2% का छिड़काव करें। 2. चूर्णी फफूंदी (Powdery Mildew) लक्षण: पत्तियों और कलियों पर सफेद चूर्ण जैसा फफूंद। नियंत्रण: वेटेबल सल्फर 0.3% का छिड़काव करें। 3. तना गलन (Stem Canker) लक्षण: तनों पर भूरे/काले धब्बे, शाखाएँ सूख जाती हैं। नियंत्रण: संक्रमित भाग काटें और बोर्डो पेस्ट लगाएँ। 4. पत्ती धब्बा रोग (Leaf Spot) लक्षण: पत्तियों पर भूरे-काले धब्बे, पत्तियाँ गिर जाती हैं। नियंत्रण: कार्बेन्डाजिम या मैनकोजेब का छिड़काव करें। 5. जड़ सड़न (Root Rot) लक्षण: पौधा पीला पड़ता है, जड़ें सड़ जाती हैं। ...

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