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माखन घास (Buffalo Grass) फसल की प्रमुख किस्में:


 

माखन घास (Buffalo Grass) फसल की प्रमुख किस्में:

माखन घास, जिसे भारतीय घास या बफेलो घास भी कहा जाता है, एक उच्च गुणवत्ता वाली घास है जिसका उपयोग मुख्य रूप से पशु आहार के रूप में होता है। हालांकि माखन घास की किस्में अधिक नहीं होती हैं, कुछ प्रमुख किस्में हैं:

  1. सुपीरियर माखन घास

    • यह किस्म बेहतर पत्तियां और अधिक पैदावार देने वाली है, जो ज्यादा पोषण मूल्य प्रदान करती है।
  2. हिमालयन माखन घास

    • यह किस्म ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में अच्छे से उगती है और इसका उपयोग मुख्य रूप से फसलों के लिए चारा और भूसे के रूप में किया जाता है।
  3. कृष्णा माखन घास

    • यह किस्म तेजी से बढ़ती है और लंबे समय तक हरे रंग की रहती है।

माखन घास के प्रमुख रोग:

  1. पाउडरी मिल्ड्यू (Powdery Mildew)

    • यह एक सामान्य रोग है, जिसमें पत्तियों और तनों पर सफेद पाउडर जैसा पदार्थ बनता है। यह घास की वृद्धि को रुकता है और उसकी गुणवत्ता को प्रभावित करता है।
  2. रूट रॉट (Root Rot)

    • यह रोग घास की जड़ों को नुकसान पहुंचाता है, जिससे पौधे सूख सकते हैं। यह आमतौर पर अत्यधिक नमी की स्थिति में होता है।
  3. ब्लाइट (Blight)

    • यह रोग पत्तियों पर काले या भूरे धब्बों के रूप में दिखाई देता है और घास की सामान्य वृद्धि को रोकता है।
  4. फंगल इंफेक्शन (Fungal Infections)

    • विभिन्न प्रकार के फंगल इंफेक्शन माखन घास में देखे जा सकते हैं, जो पौधे की समग्र स्थिति को प्रभावित करते हैं।

माखन घास के प्रमुख कीट:

  1. अफीदा (Aphids)

    • ये कीट घास की पत्तियों और तनों का रस चूसते हैं, जिससे घास कमजोर हो जाती है और उसकी वृद्धि धीमी हो जाती है।
  2. कटवर्म (Cutworm)

    • यह कीट घास के तनों को काटकर उसे गिरा देता है, जिससे घास की पैदावार प्रभावित होती है।
  3. थ्रिप्स (Thrips)

    • ये कीट पत्तियों का रस चूसते हैं और पत्तियों को सिकुड़ने और खराब करने में योगदान करते हैं।
  4. लार्वा और चूहे (Larvae & Rodents)

    • चूहे और उनके लार्वा माखन घास की जड़ों को खा सकते हैं, जिससे घास की वृद्धि प्रभावित होती है।
  5. माइट्स (Mites)

    • माइट्स छोटे कीट होते हैं जो पत्तियों की निचली सतह पर रहते हैं और इनका भी रस चूसने का कार्य होता है।

इन रोगों और कीटों से बचाव के लिए माखन घास की फसल पर कीटनाशकों का उपयोग, अच्छी जल निकासी, और खेतों का नियमित निरीक्षण करना आवश्यक होता है।

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