अफीम (पोस्त) फसल की प्रमुख किस्में:
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चंदेरी
- यह किस्म मध्य प्रदेश के लिए उपयुक्त है और अच्छे दाने एवं अफीम उत्पादन के लिए जानी जाती है।
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मधुलिका
- यह किस्म अधिक अफीम उत्पादन और उच्च तेल सामग्री के लिए जानी जाती है।
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जवाहर अफीम-16 (Jawahar Opium-16)
- यह किस्म रोग प्रतिरोधी और उच्च पैदावार देने वाली है।
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नरमदा
- यह किस्म सूखा सहनशील होती है और अच्छे बीज उत्पादन के लिए उपयुक्त है।
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पी.आर. 108 (PR 108)
- यह किस्म विभिन्न जलवायु परिस्थितियों के लिए अनुकूल है और उच्च अफीम उत्पादन करती है।
अफीम के प्रमुख रोग:
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डाउनी मिल्ड्यू (Downy Mildew)
- पत्तियों के नीचे सफेद फफूंद जैसा पदार्थ बनता है, जिससे पौधे की वृद्धि रुक जाती है।
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पाउडरी मिल्ड्यू (Powdery Mildew)
- यह रोग पत्तियों पर सफेद पाउडर जैसा दिखता है, जो पौधों को कमजोर करता है।
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जड़ गलन (Root Rot)
- इस रोग में जड़ें गल जाती हैं, जिससे पौधा सूखने लगता है।
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झुलसा रोग (Leaf Blight)
- पत्तियों पर भूरे या काले धब्बे बनते हैं, जिससे पौधा कमजोर हो जाता है।
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विल्ट (Wilt)
- यह रोग पौधों को मुरझा कर सूखा देता है।
अफीम के प्रमुख कीट:
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अफीदा (Aphids)
- ये कीट पौधों का रस चूसते हैं, जिससे पत्तियां और तने कमजोर हो जाते हैं।
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थ्रिप्स (Thrips)
- ये कीट पत्तियों का रस चूसते हैं और पत्तियों को सिकुड़ने लगते हैं।
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कटवर्म (Cutworm)
- यह कीट तनों को काटकर पौधे को गिरा देता है।
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पोस्ता फल छेदक (Opium Capsule Borer)
- यह कीट अफीम की फली में छेद बनाकर उसे नुकसान पहुंचाता है।
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सफ़ेद मक्खी (Whitefly)
- यह कीट पत्तियों का रस चूसते हैं और विषाणु जनित रोग फैलाते हैं।
इन रोगों और कीटों से बचाव के लिए उचित फसल प्रबंधन, फसल चक्र, जैविक नियंत्रण, और कीटनाशकों का सही उपयोग करना आवश्यक है।

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