हायब्रिड मकका
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| AHC-2033 #NEXTMEFOOD |
- 1. दानो का नारगी रंग> बेहतर बाजार का मूल्य
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- 2. भुठे पकने के बाद भी पोधे हरे हरे रहे जिस से चारा भी हरा
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- 3. जडो का गहरा होना व जड्तंत्र मजबूत जिससे सूखे के प्रति बेहतर सहनशीलतापोधो में आती है
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3033 हायब्रिड मकका के कुछ खास कारण
- दानो का गहरा नारंगी रंग व बेहतर बाजार मूल्य
- पकने पर भी पोधे हरे रहते है और अधिक हरा चारा
- फेला हुआ जड़ तंत्र जिसे से सुखा सहनशीलता बेहतर
- लोजिंग नही -तेज हवाओ आंधियो को सहने की क्षमता
खेती के बदिया तोर तरीके
बुआई का सही समय - बसंत जनवरी - मार्च खरीफ मई -अगस्त
फसल की अवधि - बसंत 105 से 115 खरीफ 90से 100
बीज की मात्रा - 8-10 kg प्रति एकड़
बीज की बुआई - बीज से बीज की दुरि 10 इंच और लाइन से लाइन की दुरि 24 इंच
बीज से बीज की दुरि 10 इंच और लाइन से लाइन की दुरि 20 इंच
खाद - 5 तन प्रति 1 एकड़ देशी खाद
उर्वरक की आवश्यकता -
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उर्वरक डालने का समय |
यूरिया |
DAP |
म्यूरेट ऑफ पोटास |
जिंक सल्फेट |
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बुआई के समय |
15 |
60 |
15 |
10-15 |
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पोधो की ऊचाईफुल |
50 |
- |
30 |
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आने का समय |
15 |
- |
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आवश्यकता के अनुसार
खरपतवार - बुआई के समय 2-3 दिन के भीतर प्रति एकड़ खेत में ------प्रति लिटर पानी के साथ 200 ली पानी
के साथ स्प्रे करे |
सिचाई नियत्रण – अंकुरण घुटने तक उचाई, फुल आने और दाने भरने के समय खेत में पर्याप्त नमी रहना बहुत जरूरी है
कटाई – जब दानो के निचला हिसा या भाग काला दिखाई दे तो ये फसल पकने का संकेत है माबी अवधि तक
भंडारण करने के लिए दान्नो में नमी का 12-से 13 % होना जरूरी है
AHC-2033
जमीन का चयन :
मकका को विभिन परकर की जमीन में उगाया जा सकता है एसी जमीन का चुनाव करे झा पर पानी निकास की अछी व्यवस्था हो व मर्दा में पानी धारण करने की अछि क्षमता हो |
जमीन की तेयारी
एक या दो गहरी जुताई के बाद एक बार पाटा चला ले अगर मर्दा गहरी भारी हो तो 2-3 गहरी जुताई की जरूरत हो सकती है दीमकके लिए अचासा दीमक नाशी मर्दा में मिला ले
खाद की मात्रा
जेविक खाद की प्रयोग करे
रसायनिक खाद
सिफारिश उर्वरक का समय अनुसार उपयोग बेहतरीन उपज में सहायक है
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उर्वरक प्रयोग का समय |
यूरिया |
DAP |
पोटास |
जिंक 33 kg/एकड़ |
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बुआई से पहले |
25 |
75 |
50 |
5 |
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दूसरी खुराक |
50 |
0 |
0 |
0 |
|
तीसरी खुराक |
50 |
0 |
10 |
0 |
याद रहे अगर आप ने तीन साल से जिंक नही दिया है तो जिंक सल्फेट 33% 5 किलो प्रति एकड़ या जिंक सल्फेट 21% रति एकड़ की दर से दे | DAP व जिंक सल्फेट कभी भी साथ नही मिलये |
बुआई
दोबीज के बिच 10 इंच व दो लाईनों के बिच 24 इंच का फासला होना आवश्यक है अधिक उपज के लिए जून से 15 जुलाई के मध्य का पूरा समय उतम है ध्यन रहे की बुआई के समय मर्दा में नमी होना जरूरी है |
सिचाई की महत्वपूर्ण अवस्थाये
अंकुरण –
पोध अवस्था – 15-25 दिन
घुठने तक की अवस्था – 35-45 दिन
बुठ पत्ती की अवस्था – 55-65 दिन
पुष्पन अवस्था – 75-85 दिन
कोमल बुठा अवस्था -- 90-100 दिन
सख्त अवस्था – 100-110 दिन
निराई गुड़ाई
मिठ्ठी में पर्याप्त नमी रहने कर दोरान लासो+एट्राजीन का प्रयोग करे |किट नियन्त्रण के लिए 15-20 दिनों के बिच 250 ml प्रति एकड़ कविनाल्फोश का छिडकाव करे व 25-से 30 दिनों के बाद फ्युराडॉन 2-3 दाने प्रति प्रति पोधे की गोभ में डाले
फसल का तेयार होना
मकका की फसल तब पककर तेयार हो जति जब भुठो का रंग भूरा हो जाता है | व दानो के निचले हिस्से पर एक कलि परत बन जाती है फसल कटाई उचित विधियों से होनी चाहिए इस के बाद इसे सही ट्रिक से सुखाया जाना चाहिए |15 % m=नमी होने पर दानो को निकाल लेना चाहिए |
सावधानिय
किसान भाइयो को सलाह दी जाती है की मक्के की बुआई इस प्रकार करे ताकि पुष्पन के समय 10 डिग्री से निचे एवम 35 डिग्री से उपर नही हो इस प्रकार के प्रतिकूल प्रभाव से बचा सके व भुठो में दाना ठिक से भरे | ऐसी समस्या आने पर फसल की सिचाई अवस्य करे |
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