मसूर फसल की प्रमुख किस्में:
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एल. 9 (L-9)
- यह किस्म जल्दी पकने वाली है और सूखा सहनशील होती है।
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एल. 4076 (L-4076)
- यह किस्म मध्यम अवधि में पकती है और उच्च पैदावार देती है।
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एल. 4147 (L-4147)
- यह किस्म रोग प्रतिरोधी है और अच्छी उपज देती है।
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पंत एल. 639 (Pant L-639)
- यह किस्म ठंडे क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है और अधिक बीज उत्पादन करती है।
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आई.पी.एल. 316 (IPL 316)
- यह किस्म जल्दी पकती है और सूखा प्रतिरोधी है।
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आई.पी.एल. 406 (IPL 406)
- यह किस्म अधिक उपज देने वाली है और विभिन्न जलवायु परिस्थितियों के लिए उपयुक्त है।
मसूर के प्रमुख रोग:
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झुलसा रोग (Alternaria Blight)
- पत्तियों और तनों पर गहरे भूरे धब्बे बनते हैं, जो पौधे की वृद्धि को रोकते हैं।
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रस्ट (Rust)
- पत्तियों पर जंग के रंग के धब्बे बनते हैं, जिससे पौधा कमजोर हो जाता है।
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चूर्णी फफूंदी (Powdery Mildew)
- पत्तियों पर सफेद पाउडर जैसा पदार्थ बनता है, जिससे पौधा कमजोर हो जाता है।
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एन्थ्रेक्नोज (Anthracnose)
- यह रोग पत्तियों, तनों और बीजों पर काले धब्बे बनाता है।
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विल्ट (Wilt)
- यह रोग पौधे को मुरझाकर सूखा देता है, जिससे पौधे की मृत्यु हो सकती है।
मसूर के प्रमुख कीट:
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अफीदा (Aphids)
- ये छोटे कीट पौधों का रस चूसते हैं, जिससे पत्तियां और फूल कमजोर हो जाते हैं।
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पॉड बोरर (Pod Borer)
- यह कीट फलियों को खाकर बीजों को नुकसान पहुंचाता है।
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कटवर्म (Cutworm)
- यह कीट तनों को काटकर पौधों को गिरा देता है।
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थ्रिप्स (Thrips)
- ये कीट पत्तियों का रस चूसते हैं, जिससे पत्तियां सिकुड़ जाती हैं।
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लीफ माइनर (Leaf Miner)
- यह कीट पत्तियों में सुरंग बनाकर उन्हें नुकसान पहुंचाता है।
इन रोगों और कीटों की रोकथाम के लिए फसल चक्र, जैविक नियंत्रण, और कीटनाशकों का उचित उपयोग करना आवश्यक है।

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